उर्वशी बाली के मार्गदर्शन से बच्चों के सपनों को मिली नई दिशा और सशक्त उड़ान

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काशीपुर। बालक छात्रावास, प्रतापपुर-काशीपुर में 17 से 26 नवंबर 2025 तक चलाया गया स्किल डेवलपमेंट कैंप बच्चों के लिए उम्मीद, उत्साह और नए अवसरों का संगम बनकर उभरा, और आगे भी यह चलता ही रहेगा , इस विशेष प्रशिक्षण में 50 बच्चों ने न सिर्फ नए कौशल सीखे, बल्कि अपने भीतर छिपी संभावनाओं को समझने का मौका भी पाया। पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास पर केंद्रित इस पहल ने बच्चों के मन में सीखने की गहरी रुचि जगाई। छात्रावास परिसर हर दिन जोश, रचनात्मकता और अनुशासन से भरा रहा। यह एक कार्यक्रम नहीं बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने की सोच का मजबूत उदाहरण है ,बच्चों की आँखों में जो चमक और प्रगति दिखाई दी, वही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि साबित हुई और उन्होंने पहली बार खुद को “कुछ बड़ा कर सकने वाला” महसूस किया।

इस पूरे आयोजन का केंद्र रही समाजसेवी उर्वशी दत्त बाली, जो अपने आप से वादा चुकी है और बच्चों के प्रशिक्षण को अपना व्यक्तिगत मिशन बनाकर उसे नई दिशा देने जा रही हैं,काशीपुर के मेयर दीपक बाली की धर्मपत्नी होने के बावजूद उर्वशी दत्त बाली ने इस जिम्मेदारी को केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं, बल्कि भावनात्मक प्रतिबद्धता के रूप में निभाया। वे कक्षाओं में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहीं, बच्चों को प्रोत्साहित किया, उनकी जरूरतें समझीं और उन्हें परिवार जैसा अपनापन दिया। उनका विश्वास है कि किसी भी बच्चे की आर्थिक स्थिति उसकी उड़ान तय नहीं करती,सही मार्गदर्शन और संवेदनशील सहयोग से हर बच्चा चमक सकता है। इसी सोच के तहत उन्होंने विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को बुलाकर डांस, इंग्लिश स्पीकिंग, स्टिचिंग और हेडराइटिंग जैसी महत्वपूर्ण स्किल्स को बच्चों तक पहुँचाया। उनकी निरंतर उपस्थिति ने बच्चों के भीतर यह भरोसा जगाया कि उनके सपनों के पीछे खड़ा कोई मजबूत सहारा मौजूद है।

दस दिवसीय प्रशिक्षण में विभिन्न प्रशिक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्र में बच्चों का मार्गदर्शन किया और उन्हें नई तकनीकों से परिचित कराया। जगमोहन ने डांस की बारीकियों को बच्चों के सामने सरल और रोचक तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे उनमें तेज़ी, लय और आत्मविश्वास बढ़ा। शांतनु ने इंग्लिश स्पीकिंग की कक्षाओं में बच्चों की संवाद क्षमता निखारी और सार्वजनिक बोलने का डर खत्म किया। रजनी ठाकुर ने स्टिचिंग की कक्षाओं के माध्यम से बच्चों में स्वावलंबन और धैर्य का विकास किया। वहीं उर्वशी दत्त बाली द्वारा आयोजित हेडराइटिंग प्रशिक्षण ने बच्चों की लिखावट, प्रस्तुति और अनुशासन में उल्लेखनीय सुधार लाया। 26 नवंबर 2025 को हुए समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में डांस, संगीत, स्टिचिंग और इंग्लिश स्पीकिंग प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया। इस सम्मान ने बाकी बच्चों में भी मेहनत, अनुशासन और बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा जगाई।

कार्यक्रम की सफलता के पीछे कई संवेदनशील समाजसेवियों का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। डॉक्टर रवि सहोता, डॉक्टर रितु सहोता, संजीवनी हॉस्पिटल के मुकेश चावला, पापा बेकर के रोहित भल्ला, शरण ढिल्लन और अनुराग अग्रवाल जैसे सहयोगकर्ताओं ने प्रशिक्षण के लिए आवश्यक हर सामग्री को अपनी निजी लागत से उपलब्ध कराकर इस कैंप को संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध बनाए रखा। पुरस्कारों का प्रायोजन अनुराग अग्रवाल ने किया, जबकि शरण ढिल्लन ने समय-समय पर उपस्थित होकर बच्चों का मनोबल बढ़ाया। वार्डन कु. ज्योति राणा और समस्त स्टाफ ने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और अनुशासित तरीके से संपन्न कराया। दस दिनों में बच्चों में आया आत्मविश्वास, सकारात्मकता और सीखने की लगन यह साबित करती है कि सही दिशा और समर्पित नेतृत्व किसी भी बच्चे का भविष्य बदल सकता है। यह पूरा कार्यक्रम काशीपुर में शिक्षा और मानवता दोनों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।

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Author: Prime Focus

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