महिलाओं का घर से काम तक रोज़ का सफर, रोज़ की जीत : उर्वशी दत्त बाली

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काशीपुर। महिला दिवस के अवसर पर डी वाली ग्रुप की डायरेक्टर श्रीमती उर्वशी दत्त बाली कहती है कि हमारे समाज में आज भी महिलाएं बड़े ही संघर्षों से भरा जीवन जी रही है। कुछ तो ऐसे काम करती हैं जैसे उनके बच्चे या परिवार ही नहीं हैं,,और माँ भी बनती हैं तो ऐसी जैसे उनकी कोई महत्वाकांक्षा ही न हो। ईश्वर करे एक दिन दुनिया भी आपको ऐसा ही सहारा दे,जैसे आप घर परिवार संभालती हैं। आज की कार्यरत महिला समाज की सशक्त तस्वीर है। महिला ही वह शक्ति है जो समाज का निर्माण करती है। वह अपने बच्चों को जैसी परवरिश और संस्कार देती है, वैसा ही भविष्य और वैसा ही समाज तैयार होता है। वह केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं, बल्कि परिवार की भावनात्मक आधारशिला भी है। सुबह घर से काम करके निकलना,कार्यालय में अपनी प्रतिभा, परिश्रम और अनुशासन से पहचान बनाना और फिर शाम को थके शरीर से घर लौटकर बच्चों की परवरिश, शिक्षा, संस्कार तथा परिवार की देखभाल करना यह संतुलन साधारण नहीं, असाधारण सामर्थ्य का प्रमाण है। हर महिला को अच्छा लगता है कि वह भी कभी निश्चिंत होकर विश्राम करे, परिवार के साथ समय बिताए, सखी सहेलियों से मिले, अपनी पसंद के कार्यक्रम देखे या सुबह थोड़ी देर तक आराम से सोए। परंतु जिम्मेदारियों का बोध उसे आराम से अधिक कर्म की ओर प्रेरित करता है। वह अपने परिवार की रीढ़ बनती है, पति के साथ आर्थिक जिम्मेदारियाँ साझा करती है और घर से निकलकर कार्यस्थल तक, फिर शाम को घर लौटकर पुनः गृहकार्य में जुट जाती है। वह अपने सपनों को भी संजोती है और बच्चों के भविष्य को भी संवारती है। कई बार अपनी थकान, अपनी इच्छाएँ और अपनी जरूरतें पीछे रखकर वह परिवार की खुशियों को प्राथमिकता देती है। उसका यह त्याग, यह संतुलन और यह धैर्य समाज के लिए प्रेरणा है। ऐसी हर महिला के प्रति समाज को कृतज्ञ होना चाहिए, जो अपने कंधों पर घर और कार्यस्थल दोनों की जिम्मेदारियाँ समान निष्ठा से निभा रही है। महिला दिवस पर यही कामना है कि जिस धैर्य और समर्पण से वह दुनिया को संभालती है, एक दिन दुनिया भी उसे वैसा ही सम्मान और सहारा दे।

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Author: Prime Focus

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